गणतंत्र दिवस पर उग्र किसान: जिसका डर था, वही हुआ, 'अनुशासन का बांध' टूट गया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 26 Jan 2021 02:47 PM IST


हाथों में तलवारें, मुंह पर काला कपड़ा, पुलिसवालों पर पथराव और लाल किले पर केसरी झंडा...ये नजारा है गणतंत्र दिवस पर राजधानी दिल्ली में किसानों के उग्र आंदोलन का...वही आंदोलन, जो पिछले करीब 60 दिनों से देश के कई इलाकों खासतौर से दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा है। इस आंदोलन की अब तक खास बात यह थी कि किसानों ने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखा। इसमें कहीं भी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं दिखाई दी। यहां तक कि 11 दौर की बातचीत विफल होने पर भी किसानों ने हर मौके पर संयम दिखाया। ...लेकिन गणतंत्र दिवस पर जब देशभक्ति के तरानों से पूरा देश गूंज रहा था, तब वह हो गया, जिसका डर था। किसानों ने बैरिकेड तोड़कर सिर्फ उग्र होने की शुरुआत नहीं की, बल्कि उन्होंने अनुशासन का बांध भी तोड़ दिया।

पहले से थी उपद्रव की आशंका

गौरतलब है कि किसान काफी समय से गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड निकालने की इजाजत मांग रहे थे। लेकिन उसके साथ ही यह भय सताने लगा था कि 26 जनवरी के दिन दिल्ली में उपद्रव न हो जाए। आज वही हो रहा है, जिसका डर था। दिल्ली में सैकड़ों-हजारों किसानों ने बैरिकेड ही नहीं, अनुशासन का बांध भी तोड़ दिया। वह अनुशासन और सब्र, जो किसानों की ताकत रहा। पिछले करीब दो महीने में काफी कोशिशों के बावजूद आंदोलन बदनाम नहीं हुआ। टूटा नहीं तो सिर्फ इसलिए कि अनुशासन मजबूत था।



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